कोरोना काल मे हम लोंगो से जà¥à¥œà¥€ फिर कà¥à¤¯à¤¾ था इस डाकà¥à¤Ÿà¤° ने"" ,डाकà¥à¤Ÿà¤° धरती के à¤à¤—वान होते हैं"" वाली कहावत को अपने मानवता के जजà¥à¤¬à¥‡ से सिदà¥à¤§ कर दिया।
रात हो या दिन अगर KGMU में किसी को संकट पड़ता है तब हम लोगों के दिमाग मे पहला नाम आता है डाकà¥à¤Ÿà¤° गरिमा का, आज तक डाकà¥à¤Ÿà¤° गरिमा ने कà¤à¥€ à¤à¥€ ना कोई बहाना किया या अपनी मà¥à¤¶à¥à¤•िल बताई, जब किसी की पोसà¥à¤Ÿ होती है डाकà¥à¤Ÿà¤° गरिमा हाजिर--
""देख रही हूं à¤à¥ˆà¤¯à¤¾, मेरा नमà¥à¤¬à¤° दे दीजिà¤""
बस मरीजो को à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ कराने में ही नही, जब जब कोई संकट में पड़ता है आरà¥à¤¥à¤¿à¤• रूप से उसमे à¤à¥€ डाकà¥à¤Ÿà¤° साहब आगे रहती है, इतना ही नही अपने पति और सास को à¤à¥€ धमका के दूसरों को पैसा दिलाती हैं



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